आज कल हमारे आस पास जिधर देखो उधर इतना प्रदूषण हो गया है कि साँस लेना मुश्किल हो गया है ,लोग परेशान हैं साँस नहीं ले पा रहे ,बीमार हो रहे हैं,लेकिन उपाय कोई नहीं करना चाहता, परिवर्तन कोई नहीं लाना चाहता ,जबकि परिवर्तन के बारे में एक बहुत अच्छी कहावत कही गयी है कि ,जो बदलाव आप दुनिया में चाहते हैं उसकी शुरुवात हमें स्वयं से करनी पड़ेगी , आज कल जिन पर्यावरण की समस्याओं से हम झूझ रहे हैं वो किसी से छुपी नहीं ,कोई नयी नहीं हैं पर इनका हल क्या है ??
आज हम इस संवाद में इन समस्यों का हल ढूढ़ने की कोशिश करेंगे
तो आईये चलते हैं इस सफर पे
जीवन की जो सबसे प्रमुख आवश्यकता है वो है हमारी साँस यानी
प्राण-वायु फिर
जल फिर
भोजन एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए इन चीजों की बहुत आवश्यकता होती है पर प्रश्न है कि आज इनकी हालत कैसी है ?
क्या ये खुद स्वस्थ हैं ??
इसका सीधा और सरल सा जवाब है नहीं , हमने विकास का चश्मा कुछ ऐसा पहना कि हम उसकी चकाचौंध में कहीं अन्धे हो गये हैं , हमारी प्राण वायु प्रदूषित है हमारा पीने का जल प्रदूषित है , हमारी धरती प्रदूषित है इस प्रदुषण के कुचक्र से इस प्रदूषित धरती से पैदा होने वाला अन्न भी प्रदूषित हो गया है , इस अन्न का सेवन करने से हमारा स्वस्थ क्यू न ख़राब हो , आज साधारण लोगों को बहुत गंभीर बीमारियां हैं , अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं , दवाई और स्वास्थ से जुड़ा कारोबार दिन दून रत चौगुना तेज़ी से बढ़ रहा है ,लोग जादा पैसे कमाने के लिए खूब संगर्ष कर हैं और खूब पैसा अपने स्वास्थ के इलाज पर खर्च कर रहे हैं , बस मुश्किल ये है इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास इतनी फुरसत नहीं कि वो इस ओर ध्यान दे सके कि वो और उसके आस पास का पर्यावरण कहाँ जा रहा है उसकी साँस जल और भोजन की थाली में जहर कहाँ से आ रहा है , लोगो का जब इस और ध्यान नहीं है तो इस बारे में किसी समाधान की आशा करना तो मूर्खता ही होगी
प्रदूषण -- > प्राण वायु -- >; जल -- >; धरती
इनमे से किसी एक पर फर्क से अन्य प्रभावित होते हैं
वायु से जल ,जल से धरती, धरती से फसल से सब आपस में जुड़े हुए हैं
संभावित समाधान
पेड़ की संख्या बढ़ानी पड़ेगी - हमें प्राण वायु को उत्पान करने का जो सबसे सरल मध्यम पेड़ हैं हमें उसे और बढ़ाना होगा ,पेड़ बढ़ने से जमीन की पकड़ बढ़ेगी और बारिश में बाढ़ के पानी के साथ जो मिटटी बह जाती है उसपे लगाम लगेगी
वायु - वायु में सबसे जादा प्रदूषण गाड़ियों से निकलने वाले धुंए से फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से , बिजली बनाने के लिए जलाये जाने वाले कोयले के धुएं से ,कहना पकाने इस्तेमाल होने वाली लकड़ियों से ,कूड़ा जलने पैदा धुंए से , इसी तरह अन्य माध्यमों से जलने वाले धुएं और जहरीली गैसों से , तो सबसे पहले आते हैं गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण से निपटने के संभावित उपाय पर - गाड़ियाँ ज़हरीला धुआँ उगल रही हैं उसी से प्रदुषण हो रहा है यानी गाड़ियों में कुछ जलाया जा रहा है जिसके अपशिष्ट/waste के रूप में धुआँ निकल रहा है , यानी
अगर हम जलाना बंद कर दें तो ये धुआँ नहीं निकलेगा ,
अगर धुआँ नहीं तो ये ज़हरीला प्रदूषण भी नहीं होगा ,तो क्यू न कुछ
ऐसा करें जिससे ये जलाया जाना बंद कर दिया जाये । चूँकि प्रदूषण धूंए और उसके साथ निकल रहे ज़हरीले तत्त्वों के कारण हो रहा है तो
अगर हमारी गाड़ी धुंए की जगह बिना प्रदूषण वाली वायु निकाले तो.. ??
क्या ये संभव है ? हाँ संभव है !
अगर हम अपने वाहन हवा/वायु से चलाएँ तो ये संभव है और इसका विकल्प है कम्प्रेस हवा ! इस दिशा में दुनिया भर में खोज हुई हैं और चल भी रही हैं ,
अगर हम इस उपाय पर अमल कर सके तो हमारी गाड़ी धुएं की जगह हवा तो छोड़ेगी लेकिन ये हवा प्रदूषित नहीं होगी ,यानी पर्यावरण में और प्रदूषण नहीं जायेगा और धीरे धीरे वायु शुद्ध होती चली जाएगी ! इसके अलावा बिजली से चलने वाले वाहन वायु प्रदूषण की समस्या का हल हो सकते हैं जो आज कल काफी लोकप्रिय भी हो रहे हैं !
जल - जब वायु शुद्ध होगी तो उसमें अशुद्ध वायु की तरह ज़हर नहीं घुले होंगे जो पहले पानी की सतह पर बैठ जाते थे और उसे अशुद्ध बना देते थे , अभी हमारी नदियाँ प्रदूषित हैं और धरती के नीचे का जल भी प्रदूषित हो रहा है , नदियों का प्रदूषण रोकने के लिए जरुरी उपायों में से
एक उपाय ये है कि हम नदियों में जल के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ा दें , उसके लिए हमें पानी के नीचे जीवित रह सकने वाले पेड़ों की संख्या बढ़ानी होगी ऐसे पेड़ लगाने होंगे जो ऊपर भी तैरें और नीचे भी चले जाएँ (जैसे - मनी प्लांट,कमल और अन्य पानी के अंदर रहने वाले पेड़ ) नदियों में मांसाहारी और शाखाहारी कछुए और मगरमच्छ छोड़ने पड़ेंगे जो जानवर और मानव के मृत शरीर को ठिकाने लगाने में मदद करेंगे , जल प्रदूषण का सम्बन्ध धरती के प्रदूषण से भी है इसलिए धरती को भी शुद्ध करना होगा !
धरती - धरती को शुद्ध बनाने के लिए धरती में मौजूद ज़हर को ख़तम करना होगा और उसमे आगे से ज़हर न जाये ऐसी व्यवस्था करनी पड़ेगी ,
धरती का प्रदूषण कम करने के लिए हमें खेतों में जैविक खाद और गोबर गौ मूत्र का उपयोग करना पड़ेगा ,तुलसी की खीती से उसको खाद में के रूप में पुनः इस्तेमाल करने से धरती का ज़हर काम होगा और धरती के मित्र जीव जन्तुओ की संख्या में बढ़ोतरी होगी जो धरती को और उपजाऊ बनाएंगे ,
इन्ही मित्रों में एक मित्र है बीटल (beetal) जीव,जो गोबर और मानव अपशिष्ट का गोला बना कर उसे खा जाता है और उसका निस्तारण करता है, इस तरीके से शहर और गाँवों की अपशिष्ट सीवेज समस्या सुलझाई जा सकती है,जब धरती का ज़हर कम होगा और बारिश होगी तो धरती का पानी ज़मीन के अंदर जायेगा
धरती पर प्रदूषक तत्व न होने के कारण जो जल धरती के अंदर जायेगा वो भी प्रदूषण मुक्त होगा और धरती के नीचे का जल स्तर भी बढ़ेगा
फसल/भोजन - इस
तरह से जब धरती का ज़हर कम होगा तो जैविक खेती से जो फसल पैदा होगी वो पौष्टिक होगी जिससे शरीर में आवश्यक पोषक तत्व जाएगे और हम स्वस्थ जीवन की तरफ आगे बढ़ेंगे , हमें बीमारियाँ कम होंगी हम जादा दिन तक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे !
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